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तनाव, जीवनशैली और बदलती आदतों से बढ़ रही स्वास्थ्य चुनौती
हमारी तेजी से बदलती जीवनशैली के बीच एक समस्या बेहद तेजी से बढ़ रही है, परंतु बहुत से लोग शर्म, झिझक और समाजिक संकोच के कारण इसके बारे में खुलकर बात नहीं करते बवासीर (Piles)
पेट से जुड़ी यह बीमारी भले ही आम है, लेकिन इसके कारण होने वाला दर्द, सूजन, तकलीफ़ और मानसिक बोझ इतना गहरा होता है कि व्यक्ति धीरे-धीरे सामाजिक और भावनात्मक रूप से टूटने लगता है। मेडिकल प्रैक्टिस से पता चलता है कि शहरों ही नहीं, गांवों में भी बवासीर के मरीज बढ़ते जा रहे हैं और उनकी समस्याएँ केवल शारीरिक नहीं, मानसिक और सामाजिक भी हैं।
बवासीर क्या है?
गुदा (Anal Canal) के अंदर या बाहर की नसों में सूजन आकर जब वे बढ़ जाती हैं तो उन्हें बवासीर कहा जाता है। शुरुआती अवस्था में दर्द कम होता है परंतु खून आना, जलन, और बैठने-उठने में कठिनाई बढ़ती जाती है।
अगर इलाज न हो, तो स्थिति गंभीर हो सकती है जिससे दैनिक जीवन, कामकाज, सामाजिक गतिविधियाँ प्रभावित होती हैं।
आखिर क्यों बढ़ रही है बवासीर की समस्या?
पहले इसे केवल कब्ज़ या गलत खानपान से जुड़ी समस्या माना जाता था, परंतु आधुनिक चिकित्सा और क्लासिकल होम्योपैथी दोनों ही स्वीकार करते हैं कि कई और गहरे कारण हैं:
3️⃣ मोटापा और बढ़ता आंतरिक दबाव
4️⃣ गर्भावस्था में दबाव और हार्मोनल परिवर्तन
5️⃣ बार-बार भारी वजन उठाना
6️⃣ उम्र के साथ नसों की कमज़ोरी
अब आते हैं उस पहलू पर जिसे भारत में अक्सर नजरअंदाज़ कर दिया जाता है…
मानसिक और भावनात्मक तनाव एक छुपा कारण आज की दौड़ती जिंदगी में तनाव हर व्यक्ति के जीवन का हिस्सा बन चुका है। जब तनाव लगातार और तीव्र होता है, तो उसका असर सीधे पाचन तंत्र पर पड़ता है।
होम्योपैथी और कई चिकित्सा शोध बताते हैं: “जो मन में दबता है, वह शरीर में उभरता है।”
लंबे समय का तनाव इन दिक्कतों को जन्म देता है: बार-बार कब्ज़ पाचन की क्षमता में कमी गैस, एसिडिटी अनियमित मल त्याग और यही धीरे-धीरे बवासीर का कारण बन जाता है।
मानसिक दबाव के विभिन्न रूप:
✔ नौकरी में असंतोष, अनुचित व्यवहार, असुरक्षा
✔ रहने की मजबूरी जगह पसंद न होने पर भी रहना पड़े
✔ रिश्तों में दूरी, दबाव, मनमुटाव
✔ भावनाओं को दबाकर रखना
✔ हर समय चिंता, क्रोध या बेचैनी
✔ जीवन-निर्णय लेने में असमर्थता
ऐसे लोग अक्सर कहते हैं: “सब कुछ अंदर ही अंदर सहना पड़ता है…” और यही “सहन” शाब्दिक रूप से शरीर में भी होने लगता है आंतें तनाव को पकड़ लेती हैं और मल निष्कासन प्रभावित होता है।
सामाजिक संकोच दर्द से अधिक मुश्किल : भारत में आज भी बवासीर पर बात करना शर्म का विषय माना जाता है।
बहुत से लोग: डॉक्टर को देर से दिखाते हैं , खुद इलाज करते रहते हैं , दर्द को सामान्य समझ लेते हैं , परंतु बीमारी छुपाने से रोग बढ़ता है, कम नहीं होता।
उपचार का लक्ष्य केवल लक्षण नहीं कारण होना चाहिए : कई बार व्यक्ति केवल , क्रीम , दर्द कम करने की दवाइयाँ , अस्थायी उपचार से काम चलाता रहता है, परंतु इससे बवासीर बार-बार लौट आती है।
मूल कारण को ठीक करने वाला उपचार नहीं मिलने पर बीमारी स्थाई साथी बन जाती है।
क्लासिकल होम्योपैथी सम्पूर्ण दृष्टिकोण
क्लासिकल होम्योपैथी में : शारीरिक लक्षण , मानसिक स्थिति , जीवनशैली और आदतें , पारिवारिक व परिवेश संबंधित परिस्थितियाँ सबका गहन अध्ययन किया जाता है। इसे Constitutional Treatment कहते हैं।
उपचार का उद्देश्य : कब्ज़ सुधार , पाचन तंत्र मजबूत बनाना , तनाव से प्रभावित शारीरिक प्रक्रियाओं को सामान्य बनाना , रोग की जड़ तक पहुँचकर पुनरावृत्ति रोकना यानी इलाज का केंद्र “रोग नहीं, रोगी का सम्पूर्ण व्यक्तित्व” होता है।
उपचार के साथ परामर्श का महत्व : क्लासिकल होम्योपैथी में डॉक्टर रोगी को समझने में समय देते हैं उसकी परेशानी , उसका दबा हुआ दर्द , उसके जीवन के संघर्ष , क्योंकि भावनात्मक घुटन का समाधान भी उपचार का हिस्सा है।
जीवन में सुधार के लिए छोटे लेकिन महत्वपूर्ण कदम : फाइबर युक्त भोजन सलाद, दालें, फल , पानी भरपूर , नियमित व्यायाम , मल त्याग में ज़ोर न लगाना , ज्यादा तनाव में डॉक्टर से परामर्श , देर रात जागने से बचना
रोगी का विश्वास चिकित्सा का सबसे मजबूत आधार कई लोग वर्षों तक गलत उपचारों से परेशान होते हैं और जब वे योग्य होम्योपैथ चिकित्सक तक पहुँचते हैं तो उनकी जीवन-गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखा जाता है। लेकिन पहला कदम है डर और शर्म को जीतकर सही समय पर डॉक्टर तक पहुँचें।
RANA HOMOEO CLINIC, BALAGANJ, LUCKNOW
बवासीर सहित पेट और मानसिक तनाव संबंधी रोगों के उपचार पर विशेष ध्यान यहाँ उपलब्ध सेवाएँ: विस्तृत Case-Taking (शारीरिक + मानसिक + सामाजिक पहलू)
व्यक्तिगत (Constitutional) उपचार
तनाव एवं जीवनशैली संबंधी परामर्श
लगातार फ़ॉलो-अप और हेल्थ गाइडेंस
क्लिनिक का लक्ष्य : रोगी को संपूर्ण स्वास्थ्य की ओर वापस ले जाना आत्मविश्वास, सुख और सक्रिय जीवन के साथ
स्वास्थ्य आपका अधिकार है, यदि आप… दर्द को सामान्य समझकर सह रहे हैं समाजिक संकोच में चुप हैं तनाव और मजबूरी में जी रहे हैं तो आज ही निर्णय बदलें। “पूर्ण और स्वस्थ जीवन आपका हक़ है दर्द को अपने व्यक्तित्व का हिस्सा मत बनने दीजिए।”
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